नोबेल नहीं तो राष्ट्रपति ट्रंप को उसका मेडल ही सही

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल पुरस्कार तो नहीं मिला लेकिन उन्हें नोबेल पुरस्कार का मेडल जरूर मिल गया है. नोबेल शांति पुरस्कार का यह मेडल नोबेल पुरस्कार समिति ने नहीं, बल्कि वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो ने अपना नोबेल मेडल ट्रंप को उपहार में दिया है. मारिया कोरीना मचाडो को वर्ष 2025 के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वेनेजुएला में लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए उनके अथक प्रयासों के लिए इस सम्मान से सम्मानित किया गया था.

मचाडो ने ट्रंप को भेंट किया नोबेल पदक
वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता के बाद, वहां की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार का पदक भेंट कर दिया. उन्होंने इसे दोनों देशों की आजादी की साझा लड़ाई का ऐतिहासिक प्रतीक बताया. नोबेल मेडल देने के बाद, मारिया ने कहा कि दो सदी पहले फ्रांसीसी जनरल मार्क्विस डी लाफिएट ने वेनेजुएला के स्वतंत्रता नेता सिमोन बोलिवर को जॉर्ज वाशिंगटन की तस्वीर वाला एक मेडल उपहार में दिया था. अब 200 साल के बाद बोलिवर के लोग वाशिंगटन के उत्तराधिकारी को पदक लौटा रहे हैं. ट्रंप ने इसे अपने लिए सम्मान बताया.

मारिया कोरीना मचाडो द्वारा नोबेल पदक राष्ट्रपति ट्रंप को बतौर उपहार दिये जाने पर नोबेल पुरस्कार समिति ने कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया. हालांकि अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि समिति पुरस्कार देने के बाद, विजेता पदक और राशि के साथ क्या करते हैं, उस पर समिति कभी विचार नहीं करती है. नोबेल पुरस्कार समिति ने यह भी कहा कि नोबेल पुरस्कार सदैव उसी के नाम रहता है, जिसके नाम की घोषणा हुई है. इसे किसी के नाम के साथ न तो शेयर किया जा सकता है, न ही किसी को ट्रांसफर किया जा सकता है. इसके बावजूद नोबेल पदक को अब तक 5 बार मोटी रकम लेकर बेचा जा चुका है.

खालिस सोने से बना होता है नोबेल पदक
दुनिया का सबसे प्रसिद्ध सम्मान है नोबेल पुरस्कार. भौतिकी, रसायन, चिकित्सा, अर्थशास्त्र, साहित्य और शांति के क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को नोबेल पुरस्कार दिया जाता है. इसकी शुरुआत 1901 में हुई थी. यह पुरस्कार स्वीडिश आविष्कारक और उद्यमी अल्फ्रेड नोबेल के वसीयत के अनुसार दिया जाता है. नोबेल पुरस्कार विजेता को 18 कैरेट के 175 ग्राम सोने से बना पदक दिया जाता है. इसके साथ ही एक मिलियन डॉलर से अधिक की धनराशि दी जाती है.

क्या विजेता किसी को दे सकते हैं नोबेल पुरस्कार?
ट्रंप को नोबेल पदक बतौर उपहार दिये जाने के बाद, नॉर्वे की नोबेल समिति ने पुरस्कार के नियमों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट किया है. समिति के मुताबिक, नोबेल पुरस्कार किसी के साथ साझा नहीं किया जा सकता है और ना ही किसी दूसरे के नाम हस्तांतरित हो सकता है. एक बार पुरस्कार की घोषणा होने के बाद इसे न तो बदला जा सकता है और न ही किसी और के नाम किया जा सकता है. पदक विजेता भले ही पदक किसी को दे दे लेकिन नोबेल विजेता का आधिकारिक टाइटल हमेशा उसी व्यक्ति के पास रहता है,जिसे वह दिया गया था. हालांकि नियमों की इस सख्ती के बावजूद पांच बार नोबेल पदक की नीलामी के जरिए बेचा जा चुका है.

कब-कैसे बिका नोबेल पुरस्कार?
दिमित्री मुरातोव (2022): रूसी पत्रकार मुरातोव ने यूक्रेन युद्ध से प्रभावित बच्चों की मदद के लिए अपना नोबेल शांति पदक नीलाम कर दिया था. न्यूयॉर्क में जून 2022 में हुई नीलामी में एक अज्ञात खरीदार ने इसे रिकॉर्ड 103.5 मिलियन डॉलर में खरीदा. मुरातोव ने यह पूरी रकम यूक्रेन के शरणार्थी बच्चों की मदद के लिए यूनिसेफ को दान कर दी.

जॉन नैश (2019): ‘ए ब्यूटीफुल माइंड’ फिल्म से मशहूर हुए गणितज्ञ जॉन नैश को अर्थशास्त्र में नोबेल मिला था, जो बाद में क्रिस्टी की नीलामी के जरिए 7.35 लाख डॉलर में बिका. उनके निधन के बाद उनके परिवार ने विरासत को संभालने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए इसे बेचने का फैसला किया था.

जेम्स वॉटसन (2014): जेम्स वॉटसन को डीएनए संरचना की खोज के लिए नोबेल मिला था. वह जीवित रहते हुए अपना पदक बेचने वाले पहले विजेता बने. उन्होंने इसे 4.76 मिलियन डॉलर में इसे रूसी अरबपति अलीशेर उस्मानोव को बेचा था. हालांकि विवाद होने पर उस्मानोव ने बाद में वॉटसन को सम्मान स्वरूप पदक वापस गिफ्ट कर दिया था.

फ्रांसिस क्रिक (2013): वॉटसन के साथ डीएनए की खोज में योगदान के लिए ब्रिटिश वैज्ञानिक फ्रांसिस क्रिक को नोबेल मिला, जिसे उनके परिवार ने उनकी मौत के बाद नीलाम कर दिया. चीन की एक बायोमेडिकल कंपनी के सीईओ जैक वांग ने 2.27 मिलियन डॉलर में इसे खरीदा था. नीलामी से मिली राशि को विभिन्न संस्थानों में वैज्ञानिक खोजों के लिए दान कर दिया गया.

नील्स बोहर (1940): नील्स बोहर को परमाणु संरचना पर अनूठे काम के लिए नोबेल मिला था. उन्होंने फिनलैंड युद्ध राहत के लिए रकम जुटाने के इरादे से इसे नीलाम कर दिया था. एक अज्ञात खरीदार ने इसे खरीदा और बाद में डेनमार्क के एक म्यूजियम को सौंप दिया, जहां ये आज भी सुरक्षित है.

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