नोएडा फूलोत्सव में ‘खिला’ छोटा केदारनाथ

नोएडा. शहर के सेक्टर 33 में नोएडा हाट के पास नोएडा अथोरिटी द्वारा आयोजित फूलोत्सव में इस बार आस्था और कला का अद्भुत संगम देखने को मिला. आयोजन का मुख्य आकर्षण रही केदारनाथ मंदिर की भव्य पुष्प प्रतिकृति, जिसने श्रद्धालुओं और पर्यटकों का मन मोह लिया.

रंग-बिरंगे ताजे फूलों से तैयार मंदिर की प्रतिकृति को इतनी बारीकी से सजाया गया कि वह वास्तविक धाम की झलक देती नजर आई. मंदिर के शिखर, द्वार और आसपास की संरचना को पुष्पों और हरियाली से सजीव रूप दिया गया. विशेष आकर्षण रहा फूलों से बना विशाल डमरू और त्रिशूल, जिसके सामने लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी.

महादेव भक्तों के लिए अनुपम उपहार
सनातन परंपरा में चार धाम की यात्रा और 12 ज्योतिर्लिंगों का दर्शन का काफी महत्व है. जो लोग केदारनाथ धाम जा नहीं पाते हैं या किसी कारणवश जा नहीं पाए, उनके लिए नोएडा प्राधिकरण की ओर से ये अनुपम उपहार है. पुष्पों से सजी यह प्रतिकृति उनके लिए आस्था का प्रतीक और भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम बन गई. कई भक्तों ने इसे “नोएडा का छोटा केदारनाथ” की संज्ञा दे दी.

सेल्फी प्वाइंट बना आकर्षण
पतली-पतली बांस की डंडियों के बंडल और फूलों से जगह मेहराब बनाए गए. फूलों से मेला का मुख्य तोरणद्वार सजाया गया. कहीं गौतमबुद्ध तो कहीं पुस्तक, कहीं हाथी तो कहीं कुछ और फूलों से सजावट बनाई गई और आने वाले दर्शकों के लिए सेल्फी प्वाइंट के रूप में विकसित किया गया. फूलोत्सव का सबसे आकर्षण का केंद्र केदारनाथ धाम की प्रतिकृति रही तो वहीं, करेला, टमाटर से हाथी की बड़ी प्रतिकृति बनाई गई. हरे रंग का हाथी देख हर कोई मंत्रमुग्ध होता नजर आया है. शाम के समय आकर्षक रोशनी में नहाई प्रतिकृति के सामने फोटो और सेल्फी लेने वालों की लंबी कतार देखने को मिली. परिवारों, युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

एक मंच पर बागवानी का पूरा इको-सिस्टम
फूलोत्सव के माध्यम से शहरवासियों को हरित वातावरण और प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी किया जा रहा है। पुष्प सज्जा प्रतियोगिता, बोनसाई प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन को और भी जीवंत बना दिया. बागवानी करने के शौकीन लोगों के लिए फूलोत्सव के जरिए नोएडा प्राधिकरण ने एक बेहतरीन प्लेटफार्म उपलब्ध कराया है. यहां एक मंच पर बीज से लेकर बाजार तक, पौधा से लेकर खाद तक बागवानी का पूरा इको-सिस्टम एक बैनर तले लाया गया है. ऐसे आयोजन से न केवल सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ता है, बल्कि इससे शहर की पहचान भी सुदृढ़ होती है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *