संस्कार-युक्त है विकसित भारत की परिकल्पना: प्रो. निरंजन

नई दिल्ली. दिल्ली विश्वविद्यालय की मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम समिति द्वारा ‘विकसित भारत की परिकल्पना: परिप्रेक्ष्य और चुनौतियां’ विषय पर दो दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का आयोजन 27-28 जनवरी को किया गया. दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए आयोजित इस कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम समिति के अध्यक्ष प्रो. निरंजन कुमार ने संबोधित किया. विकसित भारत पर चर्चा करते उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या भारत पहले एक विकसित राष्ट्र नहीं था? फिर तथ्यों के साथ उन्होंने बताया पहली से लेकर 16वीं-17वीं तक भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में जाना जाता था. और एक बार फिर वर्तमान समय में भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है. प्रधानमंत्री मोदी ने समृद्धि के साथ-साथ संस्कारयुक्त जिस विकसित भारत की परिकल्पना प्रस्तुत की है, उसी को ध्यान में रखकर दिल्ली विश्वविद्यालय में विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया गया है.

कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संगठक कश्मीरी लाल ने विकास, पर्यावरण और विरासत के संबंधों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र के निर्माण में प्रयोगात्मक रूप से भी सक्रिय होना पड़ेगा. हमें रूस, अमेरिका या चीन आदि दूसरे देशों की नकल करने की बजाय अपने लिए भारतीय राह बनाना होगा. उन्होंने विलियम डेलरिंपल की पुस्तक ‘द गोल्डन रोड’ की चर्चा करते हुए भारत को विश्व की तरक्की का स्रोत बताया. उन्होंने कहा कि आज के भारत का युवा आलू चिप्स के साथ माइक्रो चिप्स, चरखा के साथ चंद्रयान, योग के साथ एल्गोरिदम की भी बात करता है. भारतीय युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में पेटेंट के प्रति सजग रहने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि हमें पेटेंट लेने का प्रयास करना चाहिए ताकि हमारे ज्ञान पर कोई दूसरा न दावा कर ले. कार्यशाला में अन्य तकनीकी सत्रों में प्रो. प्रभात मित्तल, प्रो. सुरेंद्र कुमार, प्रो. रेखा सक्सेना, प्रो. रुपाली गोयनका और प्रो. रजनी साहनी आदि ने अपने-अपे विचार रखे.

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