अभिषेक कुमार
दुनिया में सबसे ज़्यादा ठगे गए हैं बच्चे
कभी उन्हें सुलाने के लिए,
कभी नींद से उठाने के लिए।
बड़ों ने बोले हैं ऐसे झूठ
कि देर से ना सोने पर आ जाता है शेर,
कि पेड़ों को होता है दर्द, जब तुम तोड़ते हो बेर।
चाय पीने से रंग हो जाता है काला,
बच्चों को उठा ले जाता है खिलौने वाला।
कि अव्वल आने पर ही माँ करेगी प्यार,
और बस आज स्कूल चले जाओ, कल आ जाएगा इतवार।
कि तुम नेक बनना, पर ज़्यादा नेकी के चक्कर में ना पड़ना,
घर पर जो मज़दूर आए, उनके बर्तन अलग रखना।
डरना होगा तुमको उनसे, जिनका भगवान अलग है,
भगवान एक हो तो भी, हर उपनाम का सम्मान अलग है।
झूठ ये भी कि रोज़ सुबह उठकर मंदिर जाना होगा,
जिसने सबको बचाया,कभी तुम्हें उसे भी बचाना होगा।
कि तुम्हारे पेट में पेड़ बनेंगे वो तरबूज़ के बीज,
हरा था खरगोश, क्योंकि उसने पूरी कर ली थी नींद।
कह कर ये सब बड़ों ने, बच्चों को खूब बहकाया है,
कभी उन्हें डराया, कभी खुद को बहलाया है।
पूछा है बच्चों ने कई बार..क्यों, कहाँ, कब और कैसे, हमें कौन बताएगा?
चुप करा दिया बड़ों ने कहकर कि जब बड़े होगे,
तब समझ में आएगा।

(रचनाकार अभिषेक कुमार ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और वर्तमान में आईटी–मीडिया क्षेत्र में कंटेंट राइटिंग, रिसर्च और डेटा विश्लेषण से जुड़े हैं। तर्क के धरातल पर शब्दों की दुनिया में सार्थक अर्थ खोजते हुए आंकड़ों का शब्द-चित्र बनाते हैं.)
