बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO के शिखर सम्मेलन से आई एक तस्वीर ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बदलते समीकरण को दर्शाया है. इस तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग हाथ मिलाते और बातचीत करते नजर आ रहे हैं. ये दृश्य खास इसलिए क्योंकि तीनों देश वैश्विक राजनीति के महत्वपूर्ण ध्रुव हैं और ये मुलाकात भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और अलग-अलग शक्ति-केंद्रों के साथ संवाद बनाए रखने की प्रभावशाली नीति को दिखाता है.
इसी सम्मेलन की एक दूसरी तस्वीर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सामने आई जो भारत-पाकिस्तान रिश्तों को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हुई. पाकिस्तान के पीएमओ की ओर से SCO की मूल ‘फैमिली फोटो’ का क्रॉप संस्करण साझा किया, जिसमें नरेंद्र मोदी समेत कई नेता दिखाई नहीं दे रहे थे. भद्द पिट जाने के बाद, शहबाज शरीफ के आधिकारिक हैंडल से पूरी तस्वीर पोस्ट की गई जिसमें मोदी और शरीफ दोनों मौजूद थे. तस्वीर क्रॉप करने के पीछे पाकिस्तान की मंशा क्या थी, वह तो सार्वजनिक नहीं हुआ लेकिन यह प्रकरण बताता है कि आज की कूटनीति बंद कमरों की बातचीत तक सीमित नहीं है.

भारत रूस के साथ रक्षा और ऊर्जा संबंध, चीन के साथ जटिल लेकिन निरंतर संवाद और अमेरिका के साथ रणनीतिक सहयोग, तीनों देशों के साथ संतुलन बनाते हुए कूटनीतिक संबंध संभाल रहा है. भारत की कोशिश किसी एक शक्ति-गुट में पूरी तरह समाहित होने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर विभिन्न देशों के साथ संबंध बनाए रखने की है. SCO में मोदी-पुतिन-जिनपिंग की तस्वीर इसी बहुध्रुवीय कूटनीति की झलक बन गई. यह तस्वीर उस दौर का प्रतीक है जिसमें भारत एक साथ आर्थिक शक्ति, रणनीतिक साझेदार और स्वतंत्र विदेश नीति वाले देश के रूप में अपनी भूमिका का विस्तार दे रहा है. मोदी-पुतिन-जिनपिंग की तस्वीर हो या क्रॉप की गई तस्वीर का विवाद, दोनों ने एक बात साफ कर दी है कि आज की वैश्विक परिदृश्य में भारत को नजरअंदाज करना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन है.
