भारत की कूटनीति अब औपचारिक बैठकों और समझौतों तक सीमित नहीं है. आज के दौर में राष्ट्र प्रमुखों की व्यक्तिगत शैली, सांस्कृतिक जुड़ाव और सोशल मीडिया की ताकत वैश्विक रिश्तों को दिशा दे रही है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इटली यात्रा इसका बड़ा उदाहरण है. इस यात्रा के दौरान एक साधारण “मेलोडी” टॉफी ने भारत-इटली संबंधों को नई पहचान दे दी. करीब 43 साल पहले 1983 में शुरू हुई यह साधारण टॉफी आज भारत की सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी का प्रतीक बन गया. इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को पीएम मोदी ने “मेलोडी” टॉफी का पैकेट उपहार में दिया. यह पल बेहद सहज और आत्मीय था. टॉफी लेते समय मेलोनी ने 12 सेकेंड की एक वीडियो क्लिप बनाई. उसमें वह हंसते हुए पीएम मोदी को धन्यवाद कहती नजर आईं. वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते ही पूरी दुनिया में वायरल हो गया.
“मेलोडी” शब्द भी अपने आप में खास है. यह मोदी और मेलोनी के नामों का मेल है. पहली बार इसका इस्तेमाल जी-20 बैठक के दौरान मेलोनी ने किया था. उसके बाद दोनों नेताओं की मुलाकातों में इसका इस्तेमाल होता रहा. अब यह केवल मजाकिया संबोधन नहीं, बल्कि भारत-इटली संबंधों की दोस्ती और आपसी विश्वास का प्रतीक बन चुका है. इस छोटे से उपहार ने डिजिटल डिप्लोमेसी की ताकत को भी दिखाया. सोशल मीडिया पर मीम्स, चर्चाएं और कमेंट में मेलोडी ही छाया रहा. ब्लिंकिट और जेप्टो जैसे प्लेटफॉर्म पर मेलोडी टॉफी सोल्ड आउट हो गई. यह दिखाता है कि सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव भी कूटनीति में भूमिका निभाते हैं.
पीएम मोदी की विदेश नीति में भावनात्मक जुड़ाव जैसे सेल्फी, गले मिलना, स्थानीय संस्कृति से जुड़ना और सहज व्यवहार उनकी कूटनीतिक पहचान बन चुका है. इटली यात्रा के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक कोलोसियम का भी दौरा किया. यह केवल पर्यटन नहीं था, बल्कि दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का संदेश भी था. भारत और इटली के रिश्ते अब “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” के स्तर पर है. वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और ऊर्जा संकट के दौर में यह साझेदारी भारत की मजबूत कूटनीतिक स्थिति को दर्शाती है.
