रुकी हुई आशा, लेकिन टूटी नहीं: प्रो. रूबी मिश्रा
सदियों से भारतीय समाज में नारी को शक्ति, सृजन और संवेदना का प्रतीक माना गया है। वह केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, बल्कि संस्कृति और सभ्यता की वाहक भी रही है। इतिहास के प्रत्येक दौर में—चाहे संघर्ष का समय हो या निर्माण का नारी ने अपने धैर्य, त्याग और समर्पण से समाज को नई…
